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Mansi Ganga का पानी पीने योग्य नहीं: एन जी टी


नई द‍िल्ली। गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए आज एनजीटी ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अधिवक्ता से Mansi Ganga के पानी की र‍िपोर्ट की बावत सवाल क‍िए ।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा से पूछा कि क्या मानसी गंगा का पानी पीने योग्य है ? इस सवाल पर प्रदूषण नियंत्रण परिषद की ओर से दाखिल रिपोर्ट का हवाला देते हुए परिषद के अधिवक्ता ने कहा कि मानसी गंगा का पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन सीवर का पानी आम दिनों में मानसी गंगा में नहीं जाता है जबक‍ि निरीक्षण के दौरान गोवर्धन निवासी हरिओम शर्मा ने परिषद के अधिकारियों को बताया था कि बरसात के दिनों में पानी का ओवर फ्लो होने के कारण सीवर का पानी भी मानसी गंगा में चला जाता है ।

परिषद के अधिवक्ता के ऐसा कहने पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने विरोध करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है क्यों कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद की रिपोर्ट के अनुसार कोलीफॉर्म की मात्रा बहुत अधिक है, जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि आम दिनों में भी सीवर का पानी मानसी गंगा में जाता है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद के जवाब से असंतुष्ट नज़र आया न्यायालय

न्यायधीश रघुवेन्द्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गब्र्याल ने सहमति जताते हुए प्रदूषण नियंत्रण परिषद की रिपोर्ट से असंतुष्टता जताते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी को इस पर एक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा ।

जिला अधिकारी मथुरा को कड़े शब्दों में हिदायत देते हुए न्यायालय ने कहा कि गोवर्धन में सभी रोड जैसे सर्विस रोड, रिंग रोड का काम जल्दी पूरा करवाया जाए जिस से आम नागरिक और यात्रियों को परेशानी का सामना ना करना पड़े।

उत्तर प्रदेश सरकार की और से मौजूद अधिवक्ता पिंकी आनंद को न्यायालय ने सरकार की तरफ से सड़कों के लिए पैसा देने में हो रही देरी के बारे में त्वरित कार्यवाही करवाने को कहा तथा पी डब्लू डी के चीफ इंजीनियर को अगली तारीख पर मौजूद रहने के लिए आदेशित किया।

कोर्ट में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी व राहुल शुक्ला ने उत्तरप्रदेश सरकार की तरफ से दाखिल शपथपत्र पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा ।

शपथ पत्र समय से ना दाखिल करने पर जिलाधिकारी भरतपुर पर लगा 10 हज़ार का जुर्माना

इसके अलावा राजस्थान सरकार की तरफ से मौजूद भरतपुर के जिला अधिकारी को न्यायालय के आदेश का अनुपालन ना करने के लिए व शपथपत्र ना दाखिल करने के लिये 10 हज़ार का जुर्माने लगाते हुए कहा कि अब भी अगर न्यायालय के आदेशों की अवमानना हुई तो अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के आदेश पारित होंगे ।

न्यायालय ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से भी अगली तारीख पर न्यायालय को राजस्थान सरकार की तरफ से हुई कार्यवाही की जानकारी उपलब्ध कराने के लिये निर्देशित किया । मामले की अगली सुनवाई 27 नवम्बर को होगी ।

-Legend News

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